धरती के चारों ओर चक्कर लगा रहे पुराने सैटेलाइट और रॉकेटों का कचरा अब एक नई मुसीबत बनता दिख रहा है। भारत की भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (PRL) के वैज्ञानिकों की ताजा रिसर्च में चेताया गया है कि अंतरिक्ष का यह कचरा आसमान में बर्फ बनने का तरीका बदल सकता है, जिसका असर मौसम और बारिश पर भी पड़ सकता है।

यह रिसर्च PRL के वैज्ञानिक त्रिनेश साना और संजय मिश्र ने नॉर्वे की वैज्ञानिक इंग्रिड मान के साथ मिलकर पूरी की है। इसमें कंप्यूटर मॉडल की मदद से यह समझने की कोशिश की गई है कि अंतरिक्ष से लौटने वाले सैटेलाइट और रॉकेटों से बने कण आसमान में मौजूद बर्फ के कणों से टकराने पर कैसे व्यवहार कर सकते हैं।
अंतरिक्ष का कचरा आसमान तक कैसे पहुंचता है
धरती के चारों ओर पुराने सैटेलाइट और रॉकेटों के हजारों टुकड़े घूम रहे हैं। जब इनमें से कुछ धरती की ओर लौटते हैं, तो वायुमंडल में दाखिल होते समय हवा से टकराने के कारण बहुत गर्म हो जाते हैं। इस दौरान इनके कुछ हिस्से टूट जाते हैं और बेहद छोटे कण बन जाते हैं। इन कणों में एल्यूमिनियम और टाइटेनियम के ऑक्साइड जैसे पदार्थ होते हैं — ये धातु और ऑक्सीजन से बने पदार्थ हैं। ये कण इतने छोटे होते हैं कि इन्हें सामान्य आंखों से नहीं देखा जा सकता।
वैज्ञानिकों ने यह समझने की कोशिश की कि जब ये कण धरती से करीब 70 से 120 किलोमीटर ऊपर मौजूद बर्फ के कणों के संपर्क में आते हैं, तो क्या होता है।
बर्फ के कणों से जुड़ने पर क्या बदलेगा
वैज्ञानिकों के मुताबिक, बर्फ के बेहद छोटे कण हवा में तैरते बर्फ के बारीक टुकड़ों जैसे होते हैं। जब अंतरिक्ष के कचरे से बने कण इनसे टकराते हैं, तो कुछ परिस्थितियों में वे आपस में जुड़कर एक समूह बना सकते हैं। इससे बर्फ के कणों का आकार, उनकी बनावट और उनके आपस में जुड़ने का तरीका प्रभावित हो सकता है। ऊपरी आसमान में बर्फ के कणों से खास तरह के बादल भी बनते हैं, इसलिए वैज्ञानिक यह समझना चाहते हैं कि अंतरिक्ष से आने वाले कण इन बादलों के बनने और बदलने की प्रक्रिया को कितना प्रभावित कर सकते हैं।
बारिश और तापमान पर पड़ सकता है असर
ऊपरी आसमान में बर्फ के कणों और बादलों में बदलाव होने से सूर्य की रोशनी और गर्मी के व्यवहार पर भी असर पड़ने की संभावना है। वैज्ञानिक अब इस बात की भी जांच में जुटे हैं कि क्या अंतरिक्ष के कचरे के कारण धरती का तापमान बढ़ रहा है, बारिश का तरीका बदल रहा है या मौसम में कोई खास बदलाव आ रहा है। यह रिसर्च अंतरिक्ष गतिविधियों के पर्यावरणीय प्रभाव को समझने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।

