पटना। बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद वोटर लिस्ट में बड़े पैमाने पर नए नाम जोड़े गए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक SIR के बाद अब तक 14 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम सूची में जुड़ चुके हैं। इस आंकड़े के सामने आते ही राज्य की सियासत गरमा गई है। विपक्षी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने इसे अपने पहले से चल रहे आरोपों का प्रमाण बताया है, जबकि सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इसे चुनाव आयोग की एक सामान्य प्रक्रिया करार दिया है।


7.41 करोड़ से बढ़कर 7.55 करोड़ मतदाता
रिपोर्ट्स के अनुसार पिछले साल 30 सितंबर को SIR प्रक्रिया पूरी होने के समय बिहार की मतदाता सूची में करीब 7.41 करोड़ नाम दर्ज थे। एक अक्टूबर 2026 तक यह संख्या बढ़कर 7.55 करोड़ हो गई है। यानी इस अवधि में लगभग 14 लाख नए मतदाता सूची से जुड़े। जानकारी के मुताबिक फॉर्म-6 भरकर करीब 18.7 लाख लोगों ने अपना नाम मतदाता सूची में दर्ज कराने के लिए आवेदन किया था, जिनमें से करीब 14 लाख आवेदन स्वीकार कर लिए गए। नाम जुड़वाने वालों में नए मतदाता, पहली बार मतदान करने वाले युवा और वे लोग भी शामिल हैं जिनके नाम पहले किसी वजह से सूची से हट गए थे।
RJD बोली- हमारा आरोप सही साबित हुआ
RJD प्रवक्ता शक्ति यादव ने कहा कि उनकी पार्टी पहले से ही आरोप लगा रही थी कि SIR के दौरान बड़ी संख्या में लोगों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए थे। उन्होंने दावा किया कि एक विधानसभा क्षेत्र में ही 25 से 30 हजार तक नाम हटाए गए थे। शक्ति यादव के मुताबिक बिहार की कुल 243 विधानसभा सीटों के हिसाब से यह आंकड़ा जोड़ें तो प्रभावित लोगों की संख्या बहुत बड़ी होगी। उन्होंने कहा कि अब वही लोग अपना नाम दोबारा जुड़वाने के लिए आवेदन कर रहे हैं। RJD प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग अब छूटे हुए नामों को जोड़ने की कोशिश कर रहा है और इस पूरे मामले में जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जिम्मेदारी लेने की मांग भी की।
BJP बोली- यह सामान्य प्रक्रिया है
बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता प्रेम रंजन पटेल ने RJD के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि मतदाता सूची में नए नाम जोड़ना चुनाव आयोग की एक सामान्य प्रक्रिया है। उनके मुताबिक नए मतदाता या ऐसे लोग जिनका नाम किसी कारण से छूट गया था, वे फॉर्म भरकर दोबारा अपना नाम जुड़वा सकते हैं। प्रेम रंजन पटेल ने दावा किया कि SIR के दौरान लोगों को आपत्ति दर्ज कराने और नाम जुड़वाने का पूरा मौका दिया गया था। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर RJD को उस समय नाम हटाए जाने पर आपत्ति थी तो पार्टी ने उसी समय जरूरी कदम क्यों नहीं उठाए।
चुनाव आयोग का पक्ष
बिहार के उप चुनाव आयुक्त अशोक कुमार के अनुसार उनके पास नाम जुड़ने की सटीक संख्या का आंकड़ा उपलब्ध नहीं होता, क्योंकि लोग ऑनलाइन आवेदन करते हैं और इसका सर्वर दिल्ली में संचालित होता है। हालांकि उन्होंने कहा कि SIR के बाद लगातार नाम जुड़वाने के लिए आवेदन आ रहे हैं और 14 लाख का आंकड़ा इससे अधिक भी हो सकता है। उन्होंने बताया कि छूटे हुए नामों को जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया गया है, जिसके तहत बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) घर-घर जाकर जांच करेंगे और पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ने की प्रक्रिया में मदद करेंगे। चुनाव आयोग ने बिहार में छूटे हुए योग्य मतदाताओं के पंजीकरण के लिए सभी जिला निर्वाचन पदाधिकारियों को अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश भी जारी किए हैं।


