भारत-चीन सीमा पर तनाव को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर ने पहली बार सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि अरुणाचल प्रदेश के कई इलाकों में जुलाई महीने से चीनी पीएलए सैनिकों के साथ आमने-सामने की स्थिति बनी हुई है। राजस्थान के अलवर में अपने जवानों को संबोधित करते हुए उन्होंने यह जानकारी दी।

एलएसी से 6-7 किमी दूर चीनी तंबू
महानिदेशक ने बताया कि असफिला जैसे क्षेत्रों में चीनी सैनिकों ने भारत की समझ वाली वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) से महज छह-सात किलोमीटर की दूरी पर तंबू लगा रखे हैं। यह बयान इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि यह उत्तरी सीमा पर बढ़ते तनाव की आधिकारिक स्वीकारोक्ति है, और यह स्थिति ब्रिक्स शिखर सम्मेलन तथा 1962 के युद्ध की सालगिरह के आसपास भी जारी रही। उन्होंने चीन को भारत का सबसे बड़ा विरोधी बताते हुए कहा कि पारंपरिक युद्ध के तरीके अब पुराने पड़ चुके हैं।
शौर्य कमांडो और स्ट्राइक कोर्स
1962 में गठित ITBP करीब 3488 किलोमीटर लंबी एलएसी की सुरक्षा करती है और अब वह पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ आधुनिक युद्धकौशल से इस चुनौती से निपटने की तैयारी कर रही है। महानिदेशक ने शौर्य कमांडो प्लाटून की सराहना की, जिन्होंने फेस-ऑफ की स्थितियों में प्रभावी जवाब दिया। ये कमांडो अब हर बॉर्डर बटालियन में तैनात होंगे। गलवान जैसी स्थितियों से निपटने के लिए ‘स्ट्राइक’ नाम का नया कोर्स तैयार किया गया है — अब तक करीब दस हजार जवानों को यह ट्रेनिंग दी जा चुकी है, 330 मास्टर ट्रेनर तैयार किए गए हैं और 2027 के अंत तक पूरा बल इस प्रशिक्षण से गुजरेगा। गौरतलब है कि 2020 के गलवान संघर्ष में चीनी सैनिकों ने पत्थर, कील लगे डंडों और लोहे की छड़ों से हमला किया था, जिसमें भारत के 20 जवान शहीद हुए थे।
ड्रोन युद्ध पर बड़ा दांव
यूक्रेन-रूस युद्ध और ईरान-अमेरिका संघर्ष का हवाला देते हुए महानिदेशक ने कहा कि आधुनिक युद्ध में ड्रोन और एंटी-ड्रोन तकनीक निर्णायक हो गई है। रूस जैसा बड़ा देश भी यूक्रेन के खिलाफ हर महीने दस से पंद्रह हजार सैनिक खो रहा है, और यह लड़ाई चौथे साल में भी जारी है। इसी सोच के साथ ITBP ने हर सीमा बटालियन में ड्रोन प्लाटून तैयार कर ली है। सरकार से मिले 400 करोड़ रुपये के फंड का 70 प्रतिशत हिस्सा ड्रोन युद्ध क्षमताओं पर लगाया जा रहा है, जबकि गृह मंत्रालय ने 4000 करोड़ रुपये की आधुनिकीकरण योजना को सैद्धांतिक मंजूरी दी है — इसमें से 1000 करोड़ सिर्फ ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम के लिए रखे गए हैं। ITBP अब खुद ड्रोन बना रहा है ताकि बाहरी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता घटे।
भूमिगत बंकर और जवानों की सुविधाएं
आधुनिक युद्ध में ऊपर की इमारतें आसान निशाना बनती हैं, इसलिए ITBP बड़े पैमाने पर भूमिगत बंकर बना रहा है। पाकिस्तान के साथ ऑपरेशन सिंदूर जैसे संघर्षों से मिले सबक भी इसमें शामिल हैं। जवानों की सुविधाओं पर भी ध्यान दिया जा रहा है — शून्य से नीचे तापमान वाले इलाकों में 383 में से 342 बैरकों को इंसुलेट किया गया है, 141 जनरेटर सेट लगाए गए हैं और सोलर वॉटर हीटर भी लगाए गए हैं। पचास साल पुराने हथियारों को बदला जा रहा है, नए ऑल-टेरेन और क्विक रिएक्शन वाहन खरीदे जा रहे हैं, और बर्फीले मौसम में वाहनों को एक क्रैंक में चालू करने वाली ‘कोल्ड स्टार्ट किट’ दी गई है। महानिदेशक ने चिंता जताई कि 2020 के बाद जवानों में अल्कोहल डिपेंडेंस के मामले दोगुने-तिगुने हो गए हैं और हनी ट्रैप से बचने की सलाह भी दी।
विपक्ष का सरकार पर निशाना
इस बीच कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि अरुणाचल में जुलाई से फेस-ऑफ जारी है, ITBP प्रमुख ने इसकी पुष्टि भी की, लेकिन प्रधानमंत्री और सरकार की चुप्पी सवाल खड़े करती है। उन्होंने कहा कि तकसिंग फेस-ऑफ के बाद वाचा-दमाई में वार्ता हुई, फिर भी स्थानीय लोगों के अनुसार गश्त बिंदु फिर खो गए हैं। रमेश ने यह भी कहा कि चीन अरुणाचल के स्थानों के नाम बदल रहा है, ब्रह्मपुत्र पर 60,000 मेगावाट का बांध बना रहा है और 2025-26 में 112 अरब डॉलर के व्यापार घाटे से एमएसएमई व ‘मेक इन इंडिया’ कमजोर पड़ रहा है। बता दें कि महानिदेशक शत्रुजीत कपूर 31 अक्टूबर को रिटायर हो रहे हैं और ITBP का 65वां स्थापना दिवस 24 अक्टूबर को मनाया जा रहा है।

