back to top
Saturday, October 24, 2026
Homeव्यापारMP: मत्स्य पालन को उद्योग का दर्जा, ₹40,000 करोड़ के निवेश प्रस्ताव...

MP: मत्स्य पालन को उद्योग का दर्जा, ₹40,000 करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिले

भोपाल। मध्यप्रदेश में मत्स्य पालन को अब उद्योग का दर्जा मिलने जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल में आयोजित राष्ट्रीय मत्स्य सम्मेलन में ऐलान किया कि मत्स्य पालन को खाद्य प्रसंस्करण और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र से जोड़ा जाएगा, जिससे इस क्षेत्र को अन्य उद्योगों जैसी छूट और प्रोत्साहन मिल सकेंगे। कार्यक्रम में केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह भी मौजूद रहे। सरकार का लक्ष्य मछली उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ प्रसंस्करण, भंडारण और निर्यात की व्यवस्था को भी मजबूत करना है।

MP: मत्स्य पालन को उद्योग का दर्जा, ₹40,000 करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिले

40 हजार करोड़ के निवेश प्रस्ताव, 3.5 लाख रोजगार

प्रदेश की एकीकृत मत्स्योद्योग नीति के तहत अब तक करीब 40 हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। सरकार के अनुमान के मुताबिक इन प्रस्तावों के क्रियान्वयन से लगभग 3.5 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार व स्वरोजगार के अवसर बनेंगे। कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में मुख्यमंत्री ने ‘मध्यप्रदेश मत्स्य निवेश एवं निर्यात मार्गदर्शिका’ का विमोचन भी किया, जिसका उद्देश्य निजी निवेश आकर्षित करना और मत्स्य उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देना है।

चार जलाशयों में 7,430 करोड़ का केज कल्चर

नीति के तहत प्रदेश के इंदिरा सागर, बरगी, बाणसागर और बारना जलाशयों में आधुनिक केज कल्चर और संबंधित सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इसके लिए 7,430 करोड़ रुपये के निवेश का उल्लेख किया गया है। केज कल्चर में जलाशयों के भीतर जाल से बने पिंजरों में नियंत्रित तरीके से मछलियां पाली जाती हैं। इस परियोजना से करीब चार लाख मीट्रिक टन अतिरिक्त मछली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।

तीन साल में उत्पादन दोगुना करने का लक्ष्य

मध्यप्रदेश में मत्स्य पालन के लिए करीब 4.50 लाख हेक्टेयर जलक्षेत्र उपलब्ध है। वर्ष 2025-26 में प्रदेश में 4.95 लाख मीट्रिक टन से अधिक मछली उत्पादन हुआ, जिसे अब तक का सर्वाधिक बताया गया है। मत्स्योद्योग नीति-2026 के तहत जलाशयों में करीब एक लाख केज स्थापित करने और अगले तीन वर्षों में उत्पादन दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया है। केंद्र सरकार ने प्रदेश को रिजर्वायर फिशरीज क्लस्टर कार्यक्रम में भी शामिल किया है, जिसके तहत रायसेन के हलाली और खंडवा के इंदिरा सागर जलाशय को मॉडल के रूप में विकसित किया जा रहा है। हलाली की मछली उत्पादकता 2024-25 में 361 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर दर्ज हुई थी, जो मध्यम श्रेणी के जलाशयों में सर्वाधिक है।

मोती, मखाना और बतख पालन भी

एकीकृत मत्स्य पालन के तहत मछली के साथ मोती उत्पादन, मखाना, सिंघाड़ा, कमल, बतख और कुक्कुट पालन को भी बढ़ावा दिया जाएगा। एक्वापोनिक्स और हाइड्रोपोनिक्स तकनीकों से सब्जियों व अन्य उत्पादों का उत्पादन बढ़ाने की योजना है। केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने बताया कि भारत का मछली उत्पादन 95 लाख टन से बढ़कर 198 लाख टन हो गया है, जबकि मत्स्य निर्यात 30,213 करोड़ रुपये से बढ़कर 62,408 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इस क्षेत्र से करीब छह करोड़ लोगों की आजीविका जुड़ी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में पर्याप्त जल संसाधन और बढ़ती सिंचाई क्षमता मत्स्य पालन के विस्तार के लिए बड़े अवसर प्रदान करती है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments