back to top
Friday, October 16, 2026
Homeदेशबस्तर में 35 लाख के इनामी 6 नक्सलियों ने डाले हथियार

बस्तर में 35 लाख के इनामी 6 नक्सलियों ने डाले हथियार

छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में नक्सल विरोधी अभियान को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। बीजापुर जिले में छह माओवादी कैडरों ने हथियार छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है। इन छह लोगों पर कुल 35 लाख रुपये का इनाम घोषित था। पुलिस इस घटनाक्रम को संगठन के लिए बड़ा झटका मान रही है, क्योंकि सरेंडर करने वालों में संगठन की अहम जिम्मेदारियां संभाल रहे कैडर भी शामिल हैं।

कौन हैं सरेंडर करने वाले छह कैडर

बीजापुर पुलिस के अनुसार, हथियार डालने वालों में रानी सोढ़ी उर्फ संध्या, पांडो पोड़ियम उर्फ सस्मिता, सुक्कू कुड़ियम उर्फ संतोष, कोसा माड़वी उर्फ सतीश, देवे मड़कम उर्फ जन्नी और लालू ताती शामिल हैं। इनमें से पहले चार कैडरों पर आठ-आठ लाख रुपये का इनाम था। देवे मड़कम पर दो लाख और लालू ताती पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित था। इस तरह इन सभी पर घोषित इनाम की कुल रकम 35 लाख रुपये बनती है। पुलिस के मुताबिक, सरेंडर करने वालों में चार पीपीसीएम और दो पीएम रैंक के कैडर शामिल हैं।

ओडिशा नेटवर्क से जुड़े थे चार कैडर

सरेंडर करने वाले चार कैडर ओडिशा में सक्रिय माओवादी नेटवर्क से जुड़े बताए गए हैं। इनमें से तीन कंपनी नंबर-08 से और एक कंपनी नंबर-02 से संबंधित था। रानी सोढ़ी, पांडो पोड़ियम और सुक्कू कुड़ियम कंपनी नंबर-08 के कैडर थे। पुलिस का दावा है कि सुक्कू कुड़ियम ओडिशा में सक्रिय माओवादी नेता गणेश उईका का सुरक्षा गार्ड था। कोसा माड़वी कंपनी नंबर-02 में ए-सेक्शन कमांडर की भूमिका निभा रहा था। देवे मड़कम कंपनी नंबर-08 की पार्टी सदस्य थीं और उन्हें माओवादी नेता जगदीश इरपा उर्फ रमन्ना की सुरक्षा टीम से भी जुड़ा बताया गया है। लालू ताती गंगालूर एरिया कमेटी का पार्टी सदस्य था।

कैसे हुआ यह आत्मसमर्पण

बीजापुर पुलिस के अनुसार, इस पूरी प्रक्रिया में जिला रिजर्व गार्ड, सीआरपीएफ की 170वीं बटालियन और पुलिस के प्रयासों की अहम भूमिका रही। पुलिस का कहना है कि लगातार चल रहे नक्सल विरोधी अभियान, माओवादी संगठन के भीतर बढ़ते दबाव, हिंसक विचारधारा से मोहभंग और शासन की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति ने इन कैडरों को संगठन छोड़ने के लिए प्रेरित किया। पुलिस की रणनीति के दो हिस्से हैं — पहला, सुरक्षा बलों की कार्रवाई से संगठन पर दबाव बनाना और दूसरा, हथियार छोड़कर सामान्य जीवन में लौटने वालों के लिए वापसी का रास्ता खोलना।

अब क्या होगा आगे

बीजापुर के पुलिस अधीक्षक उमेश कुमार गुप्ता के अनुसार, जिले में नक्सल विरोधी अभियान के साथ-साथ हिंसा का रास्ता छोड़ने वाले लोगों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने पर भी जोर दिया जा रहा है। सरेंडर करने वाले छह कैडरों के लिए अब शासन की नीति के अनुसार पुनर्वास की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी, ताकि उन्हें सामान्य जीवन में लौटने का पूरा अवसर मिल सके।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments