दिल्ली में मेट्रो स्टेशनों को बंद करने, सड़कों पर आवाजाही रोकने और लोगों को हिरासत में लेने के आरोपों से जुड़े अवमानना मामले में अब दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) और दिल्ली पुलिस — दोनों ने सुप्रीम कोर्ट के सामने अपना-अपना हलफनामा रख दिया है। दोनों पक्षों ने अपने कदमों की वजह बताई है और यह भी कहा है कि आम लोगों की परेशानी कम करने के लिए क्या-क्या इंतजाम किए गए थे।


DMRC ने क्या बताया
DMRC के चेयरपर्सन की ओर से दाखिल हलफनामे में कहा गया है कि संबंधित शनिवार को कुल 303 मेट्रो स्टेशनों में से सिर्फ 45 पर एंट्री और एग्जिट बंद की गई थी। बाकी सभी स्टेशनों पर इंटरचेंज की सुविधा सामान्य रूप से चालू रही। निगम का कहना है कि जिन स्टेशनों पर आवाजाही रोकी गई थी, उनके आसपास के स्टेशनों को खुला रखा गया, ताकि यात्रियों को ज्यादा भटकना न पड़े।
यात्रियों की संख्या आधी से भी कम
हलफनामे में एक अहम आंकड़ा भी सामने आया है। DMRC ने माना कि उस शनिवार को मेट्रो में सफर करने वालों की संख्या घटकर करीब 32 लाख रह गई, जबकि सामान्य शनिवार को यह आंकड़ा लगभग 58 लाख के आसपास रहता है। यानी यात्री संख्या में करीब 45 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। निगम ने इस गिरावट की वजह चल रहे विरोध प्रदर्शनों को बताया है। हलफनामे के मुताबिक, प्रदर्शनों के चलते बड़ी संख्या में लोगों ने यात्रा करने, रोजमर्रा के कामों और निजी या कारोबारी गतिविधियों में हिस्सा लेने से परहेज किया।
दिल्ली पुलिस का पक्ष
दिल्ली पुलिस ने भी अवमानना मामले में अपना हलफनामा दाखिल किया है। पुलिस का कहना है कि अधिसूचित प्रतिबंधित क्षेत्र के बाहर किसी भी व्यक्ति के खिलाफ पुलिस एक्ट की धारा 65 के तहत हिरासत की कार्रवाई नहीं की गई। पुलिस ने यह भी बताया कि धारा 163 के तहत प्रतिबंधित क्षेत्र की अधिसूचना में जंतर-मंतर थाने के अधिकार क्षेत्र से बाहर के कई इलाके भी शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, बैरिकेडिंग की समीक्षा की जा रही है और लोगों की आवाजाही को सुगम बनाने की अनुमति दी गई है।
अब आगे क्या
दोनों हलफनामों के बाद अब गेंद सुप्रीम कोर्ट के पाले में है। अदालत इन जवाबों पर विचार करेगी और तय करेगी कि पाबंदियों और हिरासत को लेकर उठे सवालों पर आगे क्या कदम उठाए जाएं।


