भोपाल में पुलिस थानों पर साइबर हमले की दूसरी घटना ने पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया है। अयोध्या नगर थाने के बाद अब शाहपुरा थाने के कंप्यूटर पर हैकर्स ने सेंधमारी की है। एक ही सप्ताह के भीतर दो थानों पर हुए हमलों ने पुलिस के डिजिटल रिकॉर्ड की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शुरुआती जानकारी में रैनसमवेयर हमले की आशंका जताई जा रही है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि तकनीकी जांच के बाद ही हो सकेगी।

एक सप्ताह में दूसरा थाना निशाने पर
जानकारी के अनुसार पहले अयोध्या नगर थाने का सिस्टम प्रभावित हुआ था और अब शाहपुरा थाने पर हमला हुआ है। हैकर्स ने थाने के कंप्यूटर में रखा डेटा लॉक कर दिया है, जिससे जरूरी रिकॉर्ड तक पहुंच बाधित होने की आशंका है। पुलिस विभाग के लिए यह चिंता का विषय है, क्योंकि थानों का रोजमर्रा का काम अब काफी हद तक डिजिटल सिस्टम पर निर्भर है। लगातार दूसरी घटना के बाद यह सवाल उठ रहा है कि थानों के कंप्यूटर सिस्टम की सुरक्षा में कहां चूक हो रही है।
FIR, FSL और मेडिकल रिपोर्ट पर खतरा
इस हमले में सबसे बड़ी चिंता उन रिकॉर्ड को लेकर है, जो जांच की रीढ़ माने जाते हैं। आशंका है कि शाहपुरा थाने के कंप्यूटर में दर्ज प्राथमिकी, फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला की रिपोर्ट और मेडिकल रिपोर्ट तक पहुंच प्रभावित हुई है। इसके साथ ही जांच अधिकारियों के यूजर आईडी और पासवर्ड के भी हैकर्स के हाथ लगने की आशंका जताई जा रही है। अगर इन रिकॉर्ड से छेड़छाड़ हुई तो कई मामलों की जांच प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। यही वजह है कि पुलिस इस मामले को बेहद गंभीरता से ले रही है।
CCTNS की सुरक्षा पर उठे सवाल
पुलिस थानों में अपराध और अपराधियों का रिकॉर्ड क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम यानी सीसीटीएनएस के जरिए डिजिटल रूप से दर्ज और सुरक्षित किया जाता है। इसी सिस्टम के माध्यम से एफआईआर और अन्य जरूरी दस्तावेज संभाले जाते हैं। डेटा लॉक होने या उससे छेड़छाड़ की आशंका ने इस पूरे डिजिटल ढांचे की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि पुलिस रिकॉर्ड या डिजिटल सबूतों से छेड़छाड़ का असर अदालतों में चल रहे मामलों तक भी पहुंच सकता है।
हार्ड डिस्क जांच को भेजी, साइबर विशेषज्ञों की मदद
मामले की जांच के लिए शाहपुरा थाने के कंप्यूटर की हार्ड डिस्क तकनीकी परीक्षण के लिए भेज दी गई है। पुलिस और साइबर विशेषज्ञ यह पता लगाने में जुटे हैं कि सिस्टम में सेंध कैसे लगी, डेटा किस तरीके से लॉक किया गया, इसके पीछे कौन लोग हैं और घुसपैठ कितनी गहरी रही है। यह भी जांचा जा रहा है कि कितने रिकॉर्ड प्रभावित हुए हैं और क्या पुलिस रिकॉर्ड या डिजिटल सबूतों से कोई छेड़छाड़ हुई है। अभी यह साफ नहीं है कि डेटा केवल लॉक किया गया है या उसे चुराया भी गया है। इसका खुलासा तकनीकी जांच पूरी होने के बाद ही होगा। फिलहाल फिरौती की कोई रकम या प्रभावित रिकॉर्ड की संख्या सामने नहीं आई है।

