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Friday, October 16, 2026
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महंगाई के आंकड़े आज शाम जारी होंगे, आपकी EMI और FD पर पड़ेगा सीधा असर

महंगाई और औद्योगिक उत्पादन से जुड़े अहम आंकड़े आज यानी सोमवार, 12 अक्टूबर को शाम 5:30 बजे जारी होंगे। सितंबर महीने के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) और औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) के ये आंकड़े भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की अगली मौद्रिक नीति की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे। इसका सीधा असर आपके होम लोन की ईएमआई, फिक्स्ड डिपॉजिट की ब्याज दरों और शेयर बाजार के मूड पर भी देखने को मिल सकता है।

महंगाई के आंकड़े

क्यों अहम हैं CPI और IIP के आंकड़े

इस बार के आंकड़ों में हेडलाइन और कोर महंगाई के साथ-साथ खाने-पीने की वस्तुओं की बढ़ती कीमतों और सर्विसेज इन्फ्लेशन पर खास नजर रहेगी। बेस इफेक्ट के चलते सालाना आंकड़ों में कुछ उतार-चढ़ाव दिख सकता है, इसलिए महीने-दर-महीने की रफ्तार को देखना ज्यादा सही होगा। फैक्ट्री आउटपुट में बिजली की मांग और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स के आंकड़े भी अहम होंगे। अगर बिजली की स्थिर मांग के साथ कैपेसिटी यूटिलाइजेशन बढ़ रहा है, तो यह मजबूत आर्थिक रिकवरी का संकेत माना जाएगा। फेस्टिव सीजन की खरीदारी से पहले ये आंकड़े सही ट्रेंड समझने में मदद करेंगे।

आपकी EMI और FD पर कैसा पड़ेगा असर

अगर महंगाई दर ऊंची बनी रहती है, तो आरबीआई ब्याज दरों में कटौती को टाल सकता है, जिससे रेपो-लिंक्ड लोन की दरों में कोई बदलाव नहीं होगा। बैंकों की फंडिंग कॉस्ट के आधार पर MCLR तय होता है, जो लिक्विडिटी और बॉन्ड यील्ड के हिसाब से घटता-बढ़ता है। महंगाई कम होने की सूरत में बैंक सबसे पहले अपनी डिपॉजिट दरें घटा सकते हैं। ऐसे में बचत करने वाले निवेशक FD लेडरिंग की रणनीति अपना सकते हैं। वहीं लोन लेने वालों को अपनी रीसेट डेट्स पर नजर रखनी चाहिए और दरें कम होने की स्थिति में ही प्रीपेमेंट का फैसला लेना चाहिए। याद रहे, RBI की मौद्रिक नीति समिति ने 7 अक्टूबर को ही रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी करके इसे 5.50 प्रतिशत कर दिया था।

निवेशकों के लिए क्या है रणनीति

आंकड़ों में किसी भी अप्रत्याशित बदलाव का सबसे पहला असर बॉन्ड यील्ड पर दिखता है, जिसके बाद बैंक और एनबीएफसी अपनी दरें तय करते हैं। महंगाई के आंकड़ों में नरमी आमतौर पर लंबी अवधि के डेट फंड्स के लिए अच्छी मानी जाती है, हालांकि आंकड़ों के संशोधन से उतार-चढ़ाव आ सकता है। बॉन्ड यील्ड घटने पर इक्विटी ट्रेडर्स ऑटो, रियल एस्टेट और कंज्यूमर शेयरों का रुख करते हैं। बड़ी खरीदारी की योजना बना रहे लोग इस हफ्ते मिलने वाले फाइनेंसिंग ऑफर्स पर नजर रख सकते हैं, लेकिन जल्दबाजी न करें — बाजार का रुख साफ होने के बाद ही लेंडर्स अपनी शर्तें बदलते हैं। शाम 5:30 बजे से पहले अपनी चेकलिस्ट तैयार रखें और आंकड़ों के आते ही हड़बड़ी में कोई ट्रेड न करें, बल्कि आधिकारिक नतीजों और संस्थागत कमेंट्री का इंतजार करें।

SBI का अनुमान और आम लोगों की चिंता

भारतीय स्टेट बैंक की रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक सितंबर में खुदरा महंगाई दर 5.65 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि अक्टूबर-नवंबर में यह 6.5 प्रतिशत से ऊपर जा सकती है। जुलाई में CPI 4.45 प्रतिशत और अगस्त में 4.82 प्रतिशत दर्ज हुई थी। दूसरी ओर RBI के सितंबर सर्वे में आम परिवारों ने अगले एक साल में महंगाई के 10 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान जताया है, जबकि उन्हें मौजूदा महंगाई करीब 8.4 प्रतिशत महसूस हो रही है। हालांकि RBI ने स्पष्ट किया है कि 10 प्रतिशत का आंकड़ा उसका आधिकारिक पूर्वानुमान नहीं, बल्कि लोगों की धारणा है।

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