हेल्थकेयर सेक्टर की कंपनी पारस हेल्थकेयर का आईपीओ अगले हफ्ते निवेशकों के लिए खुलने जा रहा है। कंपनी ने इश्यू का प्राइस बैंड तय कर दिया है, और ग्रे मार्केट में भी इस इश्यू को लेकर हलचल दिख रही है। आईपीओ में पैसा लगाने से पहले इसकी तारीखों, न्यूनतम निवेश, हिस्सेदारी के बंटवारे और कंपनी की वित्तीय स्थिति को समझना जरूरी है।


आईपीओ की अहम तारीखें
पारस हेल्थकेयर का आईपीओ 21 अक्टूबर से 23 अक्टूबर 2026 तक सब्सक्रिप्शन के लिए खुला रहेगा। शेयरों का अलॉटमेंट 26 अक्टूबर को होने की संभावना है, जबकि कंपनी के शेयर 28 अक्टूबर 2026 को बाजार में लिस्ट हो सकते हैं। दिलचस्प बात यह है कि 21 अक्टूबर को ही जियो प्लेटफॉर्म्स का इश्यू भी सब्सक्रिप्शन के लिए खुलने वाला है, इसलिए उस हफ्ते प्राथमिक बाजार में दो बड़े इश्यू एक साथ होंगे।
इश्यू का आकार और प्राइस बैंड
कंपनी ने इश्यू का प्राइस बैंड 660 रुपये से 693 रुपये प्रति शेयर तय किया है। इस आईपीओ के जरिए कुल 1,450 करोड़ रुपये जुटाने की योजना है। इसमें 500 करोड़ रुपये के नए शेयर जारी किए जाएंगे, जबकि 950 करोड़ रुपये का ऑफर फॉर सेल यानी ओएफएस शामिल है। ओएफएस का पैसा मौजूदा शेयरधारकों को जाता है, जबकि नए शेयरों से मिलने वाली रकम कंपनी के पास आती है।
कितना लगेगा न्यूनतम निवेश
आईपीओ का एक लॉट 21 शेयरों का है। ऊपरी प्राइस बैंड 693 रुपये के हिसाब से रिटेल निवेशकों को कम से कम 14,553 रुपये का निवेश करना होगा। इश्यू में संस्थागत निवेशकों यानी क्यूआईबी के लिए 75 फीसदी, गैर-संस्थागत निवेशकों यानी एचएनआई के लिए 15 फीसदी और रिटेल निवेशकों के लिए 10 फीसदी हिस्सा निर्धारित है।
ग्रे मार्केट में क्या संकेत मिल रहे हैं
आईपीओ से पहले ग्रे मार्केट में पारस हेल्थकेयर के शेयरों का जीएमपी करीब 83 रुपये बताया जा रहा है। ऊपरी प्राइस बैंड 693 रुपये में इसे जोड़ें, तो शेयर की अनुमानित लिस्टिंग कीमत 776 रुपये बनती है। इस हिसाब से करीब 12 फीसदी प्रीमियम का संकेत मिलता है। हालांकि, जीएमपी अनौपचारिक बाजार का संकेत है और इसमें तेजी से बदलाव हो सकता है। यह शेयर की वास्तविक लिस्टिंग कीमत या मुनाफे की गारंटी नहीं देता। निवेश का फैसला केवल जीएमपी के आधार पर नहीं लेना चाहिए।
कंपनी की वित्तीय स्थिति कैसी है
कंपनी के उपलब्ध वित्तीय आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 में कुल आय 1,628.78 करोड़ रुपये रही, जबकि नेट प्रॉफिट 43.83 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। इससे पहले मार्च 2025 में कंपनी को 57.98 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ था। मार्च 2024 में भी 15.33 करोड़ रुपये का घाटा दर्ज किया गया था। ये आंकड़े बताते हैं कि कंपनी हाल के वित्तीय वर्ष में घाटे से मुनाफे में लौटी है। जून 2026 तक कंपनी की कुल संपत्ति 2,202.88 करोड़ रुपये और नेटवर्थ 444.96 करोड़ रुपये थी।
कर्ज और मुनाफे के अनुपात पर नजर
जून 2026 तक कंपनी की कुल उधारी 888.89 करोड़ रुपये रही। मार्च 2024 में कंपनी की उधारी 547.53 करोड़ रुपये थी, जो मार्च 2026 तक बढ़कर 854.10 करोड़ रुपये हो गई। बढ़ती उधारी निवेशकों के लिए ध्यान देने वाला पहलू है। जून 2026 के लिए कंपनी की प्रति शेयर आय यानी ईपीएस 4.92 रुपये और नेटवर्थ पर रिटर्न यानी आरओएनडब्ल्यू 11.83 फीसदी बताया गया है। मार्च 2025 में ईपीएस और आरओएनडब्ल्यू दोनों नकारात्मक थे, जबकि मार्च 2026 में इनमें सुधार दर्ज हुआ।
निवेश से पहले किन बातों पर ध्यान दें
पारस हेल्थकेयर आईपीओ में जीएमपी सकारात्मक संकेत दे रहा है और कंपनी के हालिया आंकड़ों में मुनाफे में वापसी दिखती है। दूसरी ओर, कंपनी की उधारी में बढ़ोतरी और पिछले वर्षों के घाटे को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। निवेशकों को आईपीओ के दस्तावेजों, कंपनी के कारोबार, जोखिमों और अपनी जोखिम क्षमता का आकलन करने के बाद ही फैसला लेना चाहिए। जीएमपी के आधार पर संभावित लिस्टिंग लाभ को निश्चित रिटर्न नहीं मानना चाहिए।
स्रोत: ईटी नाउ स्वदेश, 15 अक्टूबर 2026। यह लेख केवल जानकारी के लिए है, निवेश सलाह नहीं। पैसों से जुड़ा फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह लें।


