मुंबई। भारत की आधिकारिक ऑस्कर प्रविष्टि ‘गोंधल’ का ग्लोबल ट्रेलर जारी हो गया है। संतोष दावखर की यह साइकोलॉजिकल थ्रिलर फिल्म 13 नवंबर 2026 को दुनियाभर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी। खास बात यह है कि फिल्म सात भाषाओं में रिलीज की जाएगी — हिंदी, मराठी, तमिल, तेलुगू, मलयालम, कन्नड़ और अंग्रेजी। मेकर्स का दावा है कि सात भाषाओं में ग्लोबल थिएट्रिकल रिलीज पाने वाली यह पहली मराठी फिल्म है।

ऑस्कर के लिए भारत की आधिकारिक प्रविष्टि
‘गोंधल’ को 99वें अकादमी पुरस्कारों (ऑस्कर) में सर्वश्रेष्ठ अंतरराष्ट्रीय फीचर फिल्म श्रेणी के लिए भारत की आधिकारिक प्रविष्टि के रूप में चुना गया है। मेकर्स के मुताबिक फिल्म कई अन्य श्रेणियों में भी विचाराधीन है, हालांकि उन्होंने इसकी विस्तृत जानकारी साझा नहीं की है। इससे पहले संतोष दावखर को 56वें भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (इफ्फी) में सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का सिल्वर पीकॉक पुरस्कार मिल चुका है, जहां जूरी ने फिल्म को ‘असली दुनिया में बसी शेक्सपियर की कथा’ जैसा बताया था।
नवविवाहित जोड़े की कहानी
महाराष्ट्र की सांस्कृतिक परंपराओं में रची-बसी यह कहानी नवविवाहित जोड़े सुमन और आनंदराव के इर्द-गिर्द घूमती है। उनकी जिंदगी में तब उथल-पुथल आ जाती है, जब निजी इच्छाएं, वैवाहिक जिम्मेदारियां और भक्ति आपस में टकराने लगती हैं। ट्रेलर में इस जोड़े की परेशानियों और रहस्यमयी घटनाओं की झलक मिलती है, जो इस साइकोलॉजिकल थ्रिलर की रीढ़ हैं। फिल्म में इशिता देशमुख, किशोर कदम, योगेश सोहनी और निषाद भोईर नजर आएंगे। फिल्म का निर्माण संतोष दावखर और दीक्षा दावखर ने दावखर फिल्म्स के बैनर तले किया है, जबकि सिनेमैटोग्राफी अमलेंदु चौधरी की है। मेकर्स के मुताबिक फिल्म की शुरुआत बिना कट के 25 मिनट के एक लंबे शॉट से होती है।
सात भाषाओं में वैश्विक रिलीज
मेकर्स के मुताबिक फिल्म की बहुभाषी रिलीज भारत के साथ-साथ अमेरिका, ब्रिटेन, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया, दुबई और अफ्रीका तक पहुंचेगी। लेखक-निर्देशक संतोष दावखर ने कहा कि इस फिल्म के जरिए वह भारतीय संस्कृति का वह पहलू दुनिया को दिखाना चाहते हैं, जो आमतौर पर कम ही देखने को मिलता है। उन्होंने कहा कि भारतीय सिनेमा के बारे में वैश्विक धारणा अक्सर गरीबी और जातिगत संघर्ष जैसी कहानियों से बनती है, जो महत्वपूर्ण हकीकतें तो हैं, लेकिन भारत की पूरी अभिव्यक्ति नहीं। उनके शब्दों में, ‘गोंधल’ सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि पीढ़ियों की संस्कृति, लोग और परंपराएं एक साथ आना है।
वैश्विक मंचों पर क्षेत्रीय कहानियां
दावखर ने यह भी कहा कि ऑस्कर जैसे वैश्विक मंच फिल्मकारों को अपनी जड़ों की जातीयता को महाद्वीपों तक पहुंचाने में मदद करते हैं, सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रखते। उनका कहना है कि उन्होंने यह फिल्म भारत को उसके सबसे सच्चे रूप में अनुभव कराने और एक शक्तिशाली परंपरा को सांस्कृतिक प्रामाणिकता के साथ वैश्विक पर्दे पर लाने के लिए बनाई है।

