नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी ने मध्य प्रदेश से होने वाले राज्यसभा उपचुनाव के लिए केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी को अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है। बुधवार, 28 अक्टूबर को पार्टी की केंद्रीय निर्वाचन समिति ने पुरी के नाम पर मुहर लगाई। इसके साथ ही मध्य प्रदेश की इस खाली सीट को लेकर सियासी बयानबाजी भी तेज हो गई है, क्योंकि कांग्रेस ने इस फैसले पर तीखे सवाल खड़े किए हैं।

किस सीट पर हो रहा है उपचुनाव
यह उपचुनाव उस राज्यसभा सीट के लिए हो रहा है जो पूर्व केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन के इस्तीफे से खाली हुई थी। मुरुगन ने 14 अक्टूबर को केंद्रीय मंत्रिपरिषद और राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दिया था। वे संसदीय कार्य तथा सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री थे। राज्यसभा सदस्य के रूप में उनका कार्यकाल 2 अप्रैल, 2030 तक निर्धारित था। इस्तीफा देते समय उन्होंने कहा था कि वे भाजपा को तमिलनाडु में मजबूत करने पर ध्यान देना चाहते हैं। चुनाव आयोग के कार्यक्रम के अनुसार इस सीट के लिए 12 नवंबर को मतदान होगा और उसी शाम मतगणना भी कराई जाएगी। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 2 नवंबर, नामांकनों की जांच 3 नवंबर और नाम वापसी की अंतिम तारीख 5 नवंबर तय की गई है।
कौन हैं हरदीप सिंह पुरी
74 वर्षीय हरदीप सिंह पुरी इस समय केंद्र सरकार में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हैं। वे भारतीय विदेश सेवा के सेवानिवृत्त राजनयिक रहे हैं। उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सदस्य के रूप में उनका मौजूदा कार्यकाल 25 नवंबर को समाप्त होने वाला है। मध्य प्रदेश से उम्मीदवार बनाए जाने के बाद अब उनका सियासी भविष्य इस उपचुनाव के नतीजे से जुड़ गया है। मध्य प्रदेश में भाजपा की सरकार होने के कारण राज्यसभा सदस्यों का चुनाव करने वाले विधायकों के बीच पार्टी उम्मीदवार की जीत की राह आसान मानी जा रही है। राज्यसभा सदस्यों का चुनाव विधानसभा के सदस्य करते हैं।
कांग्रेस ने क्या आरोप लगाए
कांग्रेस ने पुरी को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद भाजपा पर निशाना साधा है। पार्टी के मीडिया एवं प्रचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया पर आरोप लगाया कि ऊर्जा संकट के दौर में पुरी ने न तो नेतृत्व दिखाया और न ही लोगों को भरोसा दिलाया, बल्कि ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी होती रही। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिका के दबाव में पुरी को आगे बढ़ाया जा रहा है। मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी सवाल उठाया कि राज्यसभा के लिए मध्य प्रदेश की सीट का ही इस्तेमाल क्यों किया गया और क्या पार्टी को प्रदेश से दलित, आदिवासी या अन्य पिछड़ा वर्ग का कोई योग्य नेता नहीं मिला। सिंघार ने कहा कि प्रदेश के सम्मान और जनता के हितों की अनदेखी कर राजनीतिक समीकरण साधना भाजपा की कार्यशैली बन गई है। उन्होंने एपस्टीन फाइल्स से जुड़ी चर्चाओं का हवाला भी दिया। उल्लेखनीय है कि पुरी पहले ही एपस्टीन के साथ संबंधों के आरोपों को खारिज कर चुके हैं, इसलिए कांग्रेस के ये आरोप राजनीतिक आरोपों के दायरे में ही रखे जाने चाहिए।
आगे क्या होगा
अब सबकी नजर नामांकन प्रक्रिया पर है। यदि कांग्रेस अपना उम्मीदवार उतारती है तो 12 नवंबर को मतदान होगा, अन्यथा चुनाव निर्विरोध भी संपन्न हो सकता है। मध्य प्रदेश की राजनीति के लिहाज से यह उपचुनाव इसलिए भी अहम है क्योंकि यह सीट प्रदेश के प्रतिनिधित्व से जुड़ी है और इस पर कांग्रेस ने प्रदेश के हितों का मुद्दा उठाया है। भाजपा के लिए यह एक औपचारिक प्रक्रिया जैसा माना जा रहा है, जबकि कांग्रेस इसे सरकार को घेरने के मौके के तौर पर देख रही है।

