इंडिया-ए और न्यूजीलैंड-ए के बीच तीन मैचों की अनऑफिशियल टेस्ट सीरीज का पहला मुकाबला 24 अक्टूबर को लिंकन के बर्ट सटक्लिफ ओवल में शुरू हुआ। मुकाबले के पहले दिन इंडिया-ए की बल्लेबाजी ताश के पत्तों की तरह बिखर गई। घास से भरी पिच पर मेजबान टीम के तेज गेंदबाजों ने भारतीय बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया और पूरी टीम पहली पारी में महज 113 रनों पर सिमट गई। अनुभवी बल्लेबाजों से सजी टीम का यह प्रदर्शन निराशाजनक रहा।
![]()
घास वाली पिच पर बिखरी बल्लेबाजी
मुकाबले में टॉस जीतकर न्यूजीलैंड-ए ने पहले गेंदबाजी चुनी। हरी-भरी पिच पर गेंदबाजों को शुरुआती मदद मिली और उन्होंने इसका भरपूर फायदा उठाया। इंडिया-ए के बल्लेबाज साझेदारी बनाने में नाकाम रहे और नियमित अंतराल पर विकेट गंवाते चले गए। भारतीय टीम की पहली पारी दो सत्र पूरे होने से पहले ही समाप्त हो गई। इंडिया-ए ने पहली पारी में 39.3 ओवरों की बल्लेबाजी की और 113 रन बनाए।
कीन के पांच विकेट, गिब्सन के तीन
न्यूजीलैंड-ए के तेज गेंदबाज साइमन कीन ने पांच विकेट लेकर इंडिया-ए को बैकफुट पर ढकेला। जैक गिब्सन ने भी तीन सफलताएं हासिल कीं। वहीं क्रिस्टियन क्लार्क और फ्रेजर शीट को एक-एक विकेट मिला। देखा जाए तो इंडिया-ए के सभी 10 विकेट तेज गेंदबाजों ने चटकाए। फ्रेजर शीट ने केएल राहुल को खाता खोले बिना आउट कर टीम को शुरुआती सफलता दिलाई। इसके बाद साइमन कीन ने अपनी स्विंग और सटीक लाइन-लेंथ से भारतीय बल्लेबाजी क्रम को झकझोर दिया।
पांच बल्लेबाजों का नहीं खुला खाता
यशस्वी जायसवाल और देवदत्त पडिक्कल ने कुछ देर तक पारी संभाली, लेकिन जैक गिब्सन ने यशस्वी को आउट कर इस साझेदारी को तोड़ दिया। यशस्वी ने 17 रन बनाए, जबकि पडिक्कल 32 रन बनाकर आउट हुए। इंडिया-ए की ओर से केएल राहुल, साई सुदर्शन, वॉशिंगटन सुंदर, मुकेश चौधरी और आकाश दीप अपना खाता नहीं खोल पाए। कप्तान ध्रुव जुरेल भी सिर्फ 1 रन बना सके। पांच बल्लेबाजों के शून्य पर आउट होने से टीम का स्कोर कभी संभल ही नहीं पाया।
राठौड़ की नाबाद 44 ने बचाई लाज
लगातार गिरते विकेटों के बीच यश राठौड़ ने मोर्चा संभाला। उन्होंने आक्रामक अंदाज में रन जुटाए और आखिरी विकेट के लिए मुकेश चौधरी के साथ 32 रनों की अहम साझेदारी की। राठौड़ ने इस दौरान ज्यादातर रन बनाए और टीम को 100 के पार पहुंचाया। राठौड़ ने 49 गेंदों पर नाबाद 44 रन बनाए, जिसमें तीन छक्के और तीन चौके शामिल रहे। उनकी यह पारी इंडिया-ए को पूरी तरह शर्मनाक स्कोर से बचाने में कामयाब रही, हालांकि टीम की स्थिति अब भी बेहद कमजोर है।

