शारदीय नवरात्रि के दिनों में इंदौर के देवी मंदिरों में भक्ति का अलग ही माहौल नजर आ रहा है। रोज हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। इन्हीं में शहर का अन्नपूर्णा मंदिर भी है, जो आस्था के साथ-साथ धार्मिक पर्यटन का भी बड़ा केंद्र बन चुका है। संगमरमर से निर्मित इस मंदिर का प्रवेश द्वार दक्षिण भारतीय स्थापत्य शैली में बना है, जो इंदौर आने वाले पर्यटकों की सूची में भी शामिल रहता है।


खेतों और जंगल के बीच शुरू हुई थी मंदिर की यात्रा
करीब 67 साल पहले जब इस मंदिर का निर्माण शुरू हुआ था, तब आसपास खेती होती थी और जंगल फैला था। गिने-चुने मकान ही थे। आज स्थिति यह है कि पूरे इलाके की पहचान अन्नपूर्णा मंदिर से होती है। मंदिर के संस्थापक प्रभानंद गिरी महाराज यहां कुटिया बनाकर रहते थे और एक पेड़ के नीचे बैठकर पूजा-अर्चना करते थे।
उन्होंने अन्नपूर्णा मंदिर के निर्माण का संकल्प लिया। इस काम में उन्हें जनसहयोग भी मिलने लगा। इसके बाद दो एकड़ जमीन पर मंदिर परिसर का निर्माण शुरू हुआ।
1959 में हुई प्राण-प्रतिष्ठा, 1975 में बना भव्य प्रवेश द्वार
21 फरवरी 1959 को मंदिर में मां अन्नपूर्णा सहित तीन देवियों की प्रतिमाओं की प्राण-प्रतिष्ठा की गई। इसके बाद वर्ष 1975 में दक्षिण भारत के मीनाक्षी मंदिर की शैली में मंदिर के प्रवेश द्वार का निर्माण कराया गया। धीरे-धीरे मंदिर की ख्याति फैलने लगी और आसपास बसाहट भी बढ़ती गई। नासिक में भी इसी ट्रस्ट ने एक मंदिर का निर्माण कराया है।
चार हाथियों पर टिका प्रवेश द्वार है आकर्षण का केंद्र
चार हाथियों पर आधारित यह भव्य प्रवेश द्वार आज भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। द्वार पर अनेक मूर्तियां उकेरी गई हैं। करीब चार साल पहले लगभग 20 करोड़ रुपये की लागत से मंदिर का जीर्णोद्धार कराया गया था। नवरात्रि के दौरान मंदिर में विशेष अनुष्ठान हो रहे हैं। जिन श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं, वे माता को प्रसाद अर्पित करते हैं।
पर्यटकों के लिए भी खास है यह मंदिर
इंदौर आने वाले पर्यटक अन्नपूर्णा मंदिर के दर्शन को अपनी यात्रा का हिस्सा जरूर बनाते हैं। संगमरमर की नक्काशी, दक्षिण भारतीय शैली का प्रवेश द्वार और मंदिर परिसर की शांति यहां आने वालों को खास अनुभव देती है। नवरात्रि के दिनों में तो मंदिर में भक्तों की भीड़ और भी बढ़ जाती है।


