इंदौर में यातायात को आसान बनाने के बड़े दावे के साथ शुरू हुआ फ्लायओवर प्रोजेक्ट अब खुद लोगों के लिए मुसीबत का कारण बन गया है। शहर के चार प्रमुख चौराहों पर 267 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे सिक्स लेन फ्लायओवर का काम बेहद धीमी रफ्तार से आगे बढ़ रहा है। दो साल पहले शुरू हुआ निर्माण अभी आधा भी पूरा नहीं हो पाया है और इससे आम वाहन चालकों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है।

चारों चौराहों पर निर्माण का हाल
वर्ष 2023-24 में मूसाखेड़ी, क्रिस्टल आईटी पार्क, देवास नाका और सत्यसाईं चौराहे पर इन फ्लायओवर के निर्माण की शुरुआत हुई थी। इनकी तय समय सीमा दिसंबर 2026 रखी गई है, लेकिन मौजूदा हालात बताते हैं कि यह लक्ष्य पूरा होना लगभग नामुमकिन है। मूसाखेड़ी में 65 प्रतिशत, देवास नाका में 70 प्रतिशत, सत्यसाईं में 60 प्रतिशत और क्रिस्टल आईटी पार्क में महज 55 प्रतिशत काम ही अब तक पूरा हो सका है। गर्डर, डेक स्लैब, एप्रोच रोड, डामरीकरण और सुरक्षा से जुड़े कई अहम काम अभी बाकी हैं।
सर्विस रोड की बदहाली और रोजाना का जाम
निर्माण स्थलों के आसपास की सर्विस रोड पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। धूल-मिट्टी के गुबार, गड्ढे और संकरी हो चुकी सड़कों पर रोज वाहन चालक जूझ रहे हैं। व्यस्त समय में इन चारों चौराहों पर लंबा जाम लग जाता है। घंटों सिग्नल पर फंसे रहने से स्कूली बच्चों, दफ्तर जाने वालों और मरीजों तक को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।
देवास नाका: डायवर्जन की अनुमति का इंतजार
देवास नाका फ्लायओवर का 70 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। मांगलिया मार्ग की ओर अतिक्रमण हटाकर सर्विस रोड तैयार कर ली गई है, लेकिन कुछ हिस्सों में निर्माण जारी रखने के लिए ट्रैफिक डायवर्जन की अनुमति अभी मिलनी बाकी है। औद्योगिक क्षेत्र होने की वजह से यहां भारी वाहनों की आवाजाही लगातार रहती है, जिससे जाम की स्थिति रोज बनती है।
सत्यसाईं और मूसाखेड़ी में अलग-अलग अड़चनें
सत्यसाईं चौराहे पर शुरुआत में पाइपलाइन शिफ्टिंग ने काम रोका था, जिसे अब सुलझा लिया गया है। फिलहाल बैरिकेडिंग के बीच गर्डर लॉन्चिंग और पिलर का काम चल रहा है। बॉम्बे हॉस्पिटल और विजय नगर को जोड़ने वाले इस मार्ग पर सुबह-शाम वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं। मूसाखेड़ी में निर्माण के रास्ते में आए तीन शौचालय ब्लॉक, चौराहे की मूर्ति और अन्य अतिक्रमण हटाए गए, जबकि मंदिरों को अस्थायी रूप से दूसरी जगह शिफ्ट किया गया। करीब 35 प्रतिशत काम शेष होने की वजह से यही मार्ग सबसे ज्यादा प्रभावित है।
क्रिस्टल आईटी पार्क: सबसे धीमा काम
चारों में सबसे धीमी रफ्तार क्रिस्टल आईटी पार्क फ्लायओवर की है। शुरुआती दौर में आईसीएआर की जमीन के हस्तांतरण, एआईसीटीएसएल की साइट हैंडओवर और अवंतिका गैस की पाइपलाइन शिफ्टिंग जैसे मुद्दों ने काम में लंबा अवरोध डाला। आईटी पार्क की ओर रोज आने-जाने वालों को व्यस्त समय में सबसे ज्यादा दिक्कत झेलनी पड़ रही है।
2027 से पहले राहत मुश्किल
शहर के जाने-माने आर्किटेक्ट और प्रशासन की कई परियोजनाओं में सलाहकार रहे अतुल सेठ का कहना है कि फ्लायओवर में केवल पिलर खड़े करना ही काफी नहीं होता। गर्डर की कास्टिंग और लॉन्चिंग, सुपर स्ट्रक्चर, डेक स्लैब, एप्रोच रोड, डामरीकरण और सुरक्षा बैरियर जैसे तमाम काम समय पर होने जरूरी हैं। अगर निर्माण की रफ्तार नहीं बढ़ी तो दिसंबर की समय सीमा में काम पूरा होना असंभव है और इंदौरवासियों को इन फ्लायओवर की पूरी सुविधा 2027 में ही मिल पाएगी।

