दीपावली से ठीक एक दिन पहले इंदौर के चिड़ियाघर में खुशियों ने दस्तक दी है। चिड़ियाघर की पुरानी सदस्य मादा तेंदुए ने दो नन्हे शावकों को जन्म दिया है। इंदौर चिड़ियाघर के इतिहास में यह पहला मौका है, जब यहां तेंदुए के शावकों का जन्म हुआ है। चिड़ियाघर प्रबंधन और वन्यजीव प्रेमियों के लिए यह बेहद खास और गर्व का क्षण है।
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चिड़ियाघर में नर और मादा तेंदुआ लंबे समय से साथ रह रहे थे, लेकिन अब तक उनका परिवार आगे नहीं बढ़ पा रहा था। दोनों खुले पिंजरे में रहते थे। कुछ दिन पहले चिकित्सकों को मादा तेंदुए के गर्भवती होने की जानकारी मिली थी। इसके बाद शनिवार को उसने दो शावकों को जन्म दिया। चिड़ियाघर प्रभारी डॉ. उत्तम यादव ने बताया कि दोनों नवजात शावक पूरी तरह स्वस्थ हैं। फिलहाल दोनों अपनी मां के साथ हैं और उनकी विशेष निगरानी की जा रही है।
दो साल में 15 से ज्यादा नए मेहमान
इंदौर के चिड़ियाघर में ज्यादातर वन्यजीवों को खुले बाड़ों में रखा जाता है, ताकि उन्हें जंगल जैसा प्राकृतिक वातावरण मिल सके। इसी का नतीजा है कि पिछले दो वर्षों में चिड़ियाघर में 15 से ज्यादा नए वन्यजीवों का जन्म हुआ है। इनमें बाघ, शेर, भालू, हिप्पोपोटेमस और तेंदुए शामिल हैं। प्राकृतिक माहौल में वन्यजीवों का प्रजनन चिड़ियाघर की सफलता का बड़ा प्रमाण माना जाता है।
दस वर्षों में 26 बाघ शावकों का जन्म
पिछले दस वर्षों में चिड़ियाघर में 26 बाघ शावकों का जन्म हुआ है, जिनमें से 22 स्वस्थ होकर बड़े हुए। इसके अलावा कई वन्यजीवों को एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत दूसरे चिड़ियाघरों में भी भेजा गया है। दस वर्षों में इंदौर में 30 से अधिक शेर शावकों का जन्म हुआ है। चिड़ियाघर प्रबंधन का कहना है कि वन्यजीवों की देखभाल, खानपान और स्वास्थ्य पर लगातार ध्यान दिया जाता है, जिससे यहां प्रजनन दर अच्छी बनी हुई है।

