स्वच्छ सर्वेक्षण 2025-26 के तहत मध्य प्रदेश में स्वच्छता पुरस्कारों की दौड़ दिलचस्प हो गई है। केंद्र सरकार की सुपर स्वच्छ लीग में इंदौर और देपालपुर की जोड़ी मजबूत स्थिति में नजर आ रही है। दोनों शहरों को 11 नवंबर को नई दिल्ली में होने वाले राष्ट्रीय पुरस्कार समारोह का आमंत्रण मिल चुका है। इंदौर पहले भी स्वच्छता के क्षेत्र में देशभर में अपनी पहचान बना चुका है और इस बार भी शहर से बड़ी उम्मीदें जुड़ी हुई हैं।
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राष्ट्रपति देंगी राष्ट्रीय स्वच्छता पुरस्कार
नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू राष्ट्रीय स्वच्छता पुरस्कार प्रदान करेंगी। मध्य प्रदेश के इंदौर, देपालपुर, उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर, रीवा, सागर, देवास और बुधनी सहित कई शहर पुरस्कार की दौड़ में शामिल हैं। वहीं, राजधानी भोपाल और उसके मेंटर शहर बैरसिया को अब तक दिल्ली से न्योता नहीं मिला है। भोपाल समेत अन्य शहरों की रैंकिंग की घोषणा पुरस्कार समारोह के दौरान होने की संभावना है।
सुपर स्वच्छ लीग में मेंटर-मेंटी मॉडल
सुपर स्वच्छ लीग के तहत बड़े शहरों को छोटे शहरों की मेंटरिंग की जिम्मेदारी दी गई थी। इसका उद्देश्य छोटे शहरों में स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाना और सफाई के मानकों में सुधार करना था। इसी व्यवस्था के तहत भोपाल नगर निगम ने बैरसिया में स्वच्छता अभियान चलाकर व्यवस्थाएं सुधारने के प्रयास किए थे। बैरसिया की मुख्य सड़कों और बाजारों को धूलमुक्त बनाने के लिए भोपाल नगर निगम ने अपनी मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनें भेजी थीं। इसके अलावा दुकानदारों को कचरा संग्रहण के लिए डस्टबिन रखने और घरों में गीले-सूखे कचरे को अलग-अलग रखने के लिए थ्री-बिन सिस्टम अपनाने के प्रति जागरूक किया गया था।
सर्वे की प्रक्रिया पर उठे सवाल
बैरसिया में केंद्रीय सर्वेक्षण की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। निर्धारित व्यवस्था के अनुसार शहर की जमीनी स्थिति का आकलन करने के लिए तीन सर्वे टीमों को पहुंचना था। बताया जा रहा है कि जून-जुलाई में पहली टीम के निरीक्षण के बाद दूसरी टीम सर्वे के लिए नहीं पहुंची। ऐसे में स्थानीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं कि जब सर्वेक्षण की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई, तो शहरों की अंतिम मार्किंग किस आधार पर तय की गई? सर्वेक्षण में पुरस्कार की पात्रता के लिए 85 प्रतिशत अंक हासिल करना अनिवार्य था।

