मध्य प्रदेश के 71वें स्थापना दिवस पर राज्य सरकार ने छोटे और मझोले उद्योगों को बड़ी सौगात दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार, 1 नवंबर को भोपाल स्थित मुख्यमंत्री निवास पर आयोजित कार्यक्रम में सिंगल क्लिक के माध्यम से 900 से अधिक एमएसएमई इकाइयों के खातों में 450 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता राशि अंतरित की। इस मौके पर स्टार्टअप और औद्योगिक भूखंडों से जुड़ी घोषणाएं भी की गईं।

एक क्लिक में खातों में पहुंची राशि
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने एक ही क्लिक से सहायता राशि सीधे लाभार्थी इकाइयों के बैंक खातों में भेजी। प्रदेशभर में स्थापना दिवस के मौके पर तीन दिनों तक सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन हो रहा है। सुबह राजधानी भोपाल के शौर्य स्मारक पर कार्यक्रम हुआ, जिसके बाद मुख्यमंत्री निवास पर यह उद्योग-उद्यमिता कार्यक्रम आयोजित किया गया। सरकार का कहना है कि अनुदान की राशि समय पर और सीधे लाभार्थियों तक पहुंचाना ही इस व्यवस्था की सबसे बड़ी खासियत है।
120 स्टार्टअप को प्रोत्साहन, 75 भूखंडों के आशय पत्र
एमएसएमई इकाइयों के साथ-साथ 120 स्टार्टअप को 47.80 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि भी दी गई। इसके अलावा 75 औद्योगिक भूखंडों के आशय पत्र उद्यमियों को सौंपे गए, ताकि वे अपने नए प्रोजेक्ट जल्द जमीन पर उतार सकें। मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना के हितग्राहियों को ऋण राशि के चेक भी वितरित किए गए। कार्यक्रम की अध्यक्षता सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चेतन्य कुमार काश्यप ने की।
7,000 करोड़ का निवेश, 17,000 से अधिक रोजगार
मंत्री चेतन्य कुमार काश्यप ने बताया कि जिन इकाइयों को प्रोत्साहन राशि दी जा रही है, उन्होंने 7,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया है और प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष रूप से 17,000 से अधिक लोगों को रोजगार दे रही हैं। मध्य प्रदेश एमएसएमई विकास नीति के तहत यह सहायता दी गई है, जबकि स्टार्टअप को मदद प्रदेश की स्टार्टअप नीति 2025 के अंतर्गत मिली है। सरकार के अनुसार नई निवेश-अनुकूल नीतियों के कारण प्रदेश में औद्योगीकरण को बढ़ावा मिल रहा है।
दो साल में 2,385 करोड़ का अनुदान
राज्य सरकार ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में एमएसएमई इकाइयों को 1,300 करोड़ रुपये का अनुदान वितरित किया गया था। वित्त वर्ष 2026-27 में रविवार के वितरण को मिलाकर कुल 1,085 करोड़ रुपये वितरित हो जाएंगे। इस तरह दोनों वित्त वर्षों में कुल 2,385 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि उद्योगों तक पहुंचाई गई है। मंत्री ने यह भी बताया कि प्रदेश के 2,081 स्टार्टअप को भारत सरकार से मान्यता मिली हुई है और वित्त वर्ष 2026-27 में अब तक 1,302 स्टार्टअप पंजीकृत हुए हैं।
उद्यमिता सम्मेलन का संदेश
मुख्यमंत्री निवास पर आयोजित यह उद्यमिता सम्मेलन राज्य सरकार की उस कोशिश का हिस्सा है, जिसमें निवेश, नवाचार, रोजगार सृजन और कारोबारी विकास को एक साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। सरकार का मानना है कि समय पर अनुदान मिलने से छोटी इकाइयां अपना विस्तार कर सकेंगी और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर बनेंगे। स्थापना दिवस के मौके पर मिली इस सौगात को प्रदेश के उद्योग जगत के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

