इंदौर के केसरबाग रेलवे क्रॉसिंग पर करीब 40 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे दो लेन के ओवरब्रिज की चौड़ाई को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। इस मामले में हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है, जिस पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर दिए हैं। अब 16 अक्टूबर को होने वाली अगली सुनवाई में रेलवे को अपना पक्ष रखना होगा।


याचिका में क्या है मांग
याचिकाकर्ता डॉ. संजय कांबले का कहना है कि जिस सड़क पर यह ब्रिज बनाया जा रहा है, वह फोरलेन सड़क है। यह मार्ग शहर के बाहरी इलाकों को जोड़ने वाली अहम लिंक रोड भी है। आने वाले समय में इस रास्ते पर यातायात का दबाव काफी बढ़ने की संभावना है। ऐसे में ब्रिज का निर्माण कम से कम चार लेन में किया जाना चाहिए।
50 साल की जरूरतों का हवाला
याचिका में कहा गया है कि किसी भी बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट की योजना बनाते समय अगले 50 वर्षों की जरूरतों को ध्यान में रखना चाहिए। अगर दो लेन का ब्रिज बन गया तो भविष्य में यहां भीषण जाम की समस्या खड़ी हो सकती है। निर्माण कार्य के दौरान आसपास के रहवासियों को हो रही परेशानी का मुद्दा भी याचिका में उठाया गया है।
बाणगंगा ब्रिज का दिया उदाहरण
डॉ. कांबले ने बाणगंगा ब्रिज का उदाहरण देते हुए कहा कि उसका निर्माण भी पहले दो लेन में किया गया था, लेकिन ट्रैफिक बढ़ने पर बाद में उसे फोरलेन करना पड़ा। ऐसे में केसरबाग ब्रिज के लिए शुरुआत से ही अतिरिक्त दो लेन का प्रावधान रखा जाना चाहिए, ताकि बाद में दोबारा भारी खर्च और परेशानी न झेलनी पड़े।
16 अक्टूबर को अगली सुनवाई
याचिका पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने रेलवे समेत संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किए हैं। 16 अक्टूबर को होने वाली अगली सुनवाई में रेलवे को यह स्पष्ट करना होगा कि फोरलेन सड़क और भविष्य में बढ़ने वाले ट्रैफिक को देखते हुए भी ब्रिज दो लेन में बनाने का फैसला क्यों लिया गया।
दो महीने पहले शुरू हुआ था निर्माण
बता दें कि केसरबाग रेलवे क्रॉसिंग शहर की उन चुनिंदा क्रॉसिंग में से थी, जहां अब तक ओवरब्रिज नहीं बना था। यहां का फाटक दिनभर में 20 से ज्यादा बार बंद होता था, जिससे वाहन चालकों को भारी परेशानी होती थी। करीब दो महीने पहले फाटक बंद कर ब्रिज का निर्माण शुरू किया गया है और इसे 15 महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।


