नए साल के पहले दिन मध्य प्रदेश के प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। एक जनवरी 2027 को प्रदेश के कई भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारियों को अगली पदोन्नति मिलने जा रही है। इस फेरबदल में तीन अलग-अलग बैचों के अधिकारी शामिल हैं, जिनमें से कुछ के पास इस समय बेहद अहम विभागों की जिम्मेदारी है।
![]()
2003 बैच के तीन अधिकारी बनेंगे प्रमुख सचिव
सबसे ऊंची पदोन्नति 2003 बैच के तीन अधिकारियों को मिलने जा रही है। ये अधिकारी सचिव स्तर से प्रमुख सचिव के पद पर पहुंच जाएंगे। इनमें संजय गोयल इस समय स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव हैं, जबकि निशांत वरवड़े किसान कल्याण एवं कृषि विभाग का कामकाज संभाल रहे हैं। तीसरे अधिकारी ध्यानेश्वर पाटिल प्रतिनियुक्ति पर मुंबई में हैं, जहां वे विशेष आर्थिक क्षेत्र (स्पेशल इकोनॉमिक जोन) के विकास आयुक्त की भूमिका निभा रहे हैं। तीनों का प्रमुख सचिव बनना प्रदेश के प्रशासनिक हलकों में अहम माना जा रहा है, क्योंकि इनके पास लंबे अनुभव के साथ-साथ बड़े विभागों का दायित्व रहा है।
2011 बैच के करीब 24 अफसरों को सुपर टाइम रैंक
इसके अलावा 2011 बैच के लगभग 24 अधिकारी सुपर टाइम रैंक में पदोन्नत होंगे। इस रैंक के बाद ये अधिकारी सचिव अथवा संभागीय कमिश्नर जैसे पदों पर तैनात हो सकेंगे। इनमें कई ऐसे चर्चित नाम शामिल हैं जो इस समय जिलों में कलेक्टर की कुर्सी संभाल रहे हैं। माना जा रहा है कि इस पदोन्नति के बाद जिलों और संभागों के स्तर पर भी तबादलों और नई तैनातियों का दौर शुरू हो सकता है।
2022 बैच के आठ अधिकारियों की सीनियर ग्रेड में पदोन्नति
तीसरी श्रेणी में 2022 बैच के आठ अधिकारी आते हैं, जिन्हें सीनियर ग्रेड में पदोन्नति दी जाएगी। ये युवा अधिकारी अभी अपने करियर के शुरुआती दौर में हैं और आने वाले वर्षों में प्रदेश प्रशासन की अगली पीढ़ी के रूप में देखे जा रहे हैं।
मंत्रियों के प्रभार वाले जिलों में बदलाव की तैयारी
इसी बीच प्रदेश की राजनीति में एक और चर्चा जोर पकड़ रही है। हाल ही में प्रदेश भाजपा संगठन और सरकार के कामकाज की समीक्षा बैठक हुई थी। इस बैठक में मंत्रिमंडल विस्तार, मंत्रियों के विभागों में बदलाव और प्रभार वाले जिलों की अदला-बदली पर विचार हुआ। खबर है कि फिलहाल केवल प्रभार वाले जिलों में बदलाव के प्रस्ताव को मंजूरी मिली है। इसके पीछे वजह यह बताई जा रही है कि कई मंत्री अपने प्रभार वाले जिलों में नियमित रूप से नहीं पहुंच पाते, क्योंकि वे जिले उनके गृह नगर और भोपाल, दोनों से काफी दूर पड़ते हैं।
इंदौर में आवास खाली न करने पर पुलिस निरीक्षक पर कार्रवाई का प्रस्ताव
इंदौर से जुड़ा एक और मामला भी सुर्खियों में है। नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के इंदौर स्थित एक आवासीय भवन को खाली नहीं करने वाले एक पुलिस निरीक्षक के खिलाफ संभागीय कमिश्नर भास्कर लाक्षाकार ने दंडात्मक कार्रवाई का प्रस्ताव शासन को भेजा है। यह आवास 15,100 रुपये प्रतिमाह किराया देने की शर्त पर आवंटित किया गया था, लेकिन आरोप है कि निरीक्षक ने किसी भी तरह का किराया जमा नहीं कराया। अब ब्याज सहित पूरी राशि की वसूली की तैयारी हो रही है। आवास पर अवैध कब्जे को आधार बनाकर दंडात्मक कार्यवाही का प्रस्ताव भेजा गया है।
महापौर की नाराजगी का वीडियो हुआ वायरल
इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव की सख्ती भी इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। महापौर अपने नियमित दौरे के दौरान पार्षद जीतू राठौर के साथ सुदामा नगर सेक्टर डी के औचक निरीक्षण पर पहुंचे थे। वहां अधिकारियों की कार्यप्रणाली देखकर वे नाराज हो गए और उन्होंने कहा कि शहर में विकास कार्यों की फाइलें दफ्तरों में अटकी हुई हैं, अधिकारी कागजी खेल में लगे रहते हैं और जनता परेशान होती है। उन्होंने यह भी कहा कि इस लापरवाही से सरकार की छवि खराब होती है। महापौर की नाराजगी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद नागरिकों का कहना है कि अगर यही सख्ती तीन साल पहले दिखाई गई होती तो शहर के हालात आज कुछ और होते।

